श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 324
 
 
श्लोक  2.20.324 
महा - विष्णुर निश्वासेर नाहिक पर्यन्त ।
एक मन्वन्तरावतारेर देख लेखार अन्त ॥324॥
 
 
अनुवाद
महाविष्णु के निःश्वसन की कोई सीमा नहीं है। ज़रा देखिए, केवल मन्वन्तर-अवतारों के बारे में बोलना या लिखना कितना असंभव है!
 
"There is no limit to Mahavishnu's breaths. Just look how difficult it is to describe or write about the Manvantara incarnations alone!"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)