श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 323
 
 
श्लोक  2.20.323 
अनन्त ब्रह्माण्डे ऐछे करह गणन ।
महा - विष्णु एक - श्वासे ब्रह्मार जीवन ॥323॥
 
 
अनुवाद
"केवल एक ब्रह्मांड के लिए मन्वंतर-अवतारों की संख्या बताई गई है। असंख्य ब्रह्मांडों में कितने मन्वंतर-अवतार विद्यमान हैं, इसकी केवल कल्पना ही की जा सकती है। और ये सभी ब्रह्मांड और ब्रह्मा महाविष्णु के केवल एक निःश्वसन काल में ही विद्यमान हैं।"
 
"The number of Manvantara incarnations in just one universe is given here. Therefore, the number of Manvantara incarnations in countless universes can only be imagined. So many universes and Brahma exist only for one breath of Mahavishnu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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