| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 2: मध्य लीला » अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा » श्लोक 298 |
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| | | | श्लोक 2.20.298  | मत्स्य, कूर्म, रघुनाथ, नृसिंह, वामन ।
वराहादि - लेखा याँर ना याय गणन ॥298॥ | | | | | | | अनुवाद | | "कुछ लीला अवतार हैं मत्स्य अवतार, कच्छप अवतार, भगवान रामचंद्र, भगवान नृसिंह, भगवान वामन और भगवान वराह। इनका कोई अंत नहीं है। | | | | “Some of the Leela avatars are as follows – Matsya avatar, Kurma avatar, Lord Ramchandra, Lord Narasimha, Lord Vaman and Lord Varaha. There is no end to them. | | ✨ ai-generated | | |
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