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श्लोक 2.20.278  |
इँहो महत्स्रष्टा पुरुष - ‘महा - विष्णु’ नाम ।
अनन्त ब्रह्माण्ड ताँर लोम - कूपे धाम ॥278॥ |
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| अनुवाद |
| "भगवान विष्णु के प्रथम रूप को महाविष्णु कहा जाता है। वे समस्त भौतिक ऊर्जा के आदि रचयिता हैं। उनके शरीर के रोमछिद्रों से असंख्य ब्रह्माण्ड प्रकट होते हैं।" |
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| “The first form of Lord Vishnu is called Mahavishnu. He is the original creator of Mahat Tattva, the total material energy. The infinite universes arise from the pores of his body. |
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