श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  2.20.26 
तबे सेइ सात मोहर हस्तेते करिया ।
भूञार काछे याञा कहे मोहर धरिया ॥26॥
 
 
अनुवाद
तब सनातन गोस्वामी ने सात स्वर्ण मुद्राएँ अपने हाथों में लीं और जमींदार के पास गए। स्वर्ण मुद्राएँ उसके सामने रखते हुए उन्होंने इस प्रकार कहा।
 
After that Sanatan Goswami went to the landlord with all the seven gold coins in his hand and placing the coins in front of him, spoke thus.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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