श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 253
 
 
श्लोक  2.20.253 
इच्छा - शक्ति - प्रधान कृष्ण - इच्छाय सर्व - कर्ता ।
ज्ञान - शक्ति - प्रधान वासुदेव अधिष्ठाता ॥253॥
 
 
अनुवाद
"इच्छा शक्ति के अधिष्ठाता भगवान कृष्ण हैं, क्योंकि उनकी परम इच्छा से ही सब कुछ अस्तित्व में आता है। इच्छा में ज्ञान की आवश्यकता होती है, और वह ज्ञान वासुदेव के माध्यम से अभिव्यक्त होता है।"
 
"Lord Krishna is the embodiment of will, for everything exists by His supreme will. Will requires knowledge. And that knowledge is expressed through Vasudeva.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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