श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 205
 
 
श्लोक  2.20.205 
वासुदेवेर विलास दुई - अधोक्षज, पुरुषोत्तम ।
सङ्कर्षणेर विलास - उपेन्द्र, अच्युत दुइ - जन ॥205॥
 
 
अनुवाद
"इन आठ विस्तारों में से दो वासुदेव के लीला रूप हैं। उनके नाम अधोक्षज और पुरुषोत्तम हैं। संकर्षण के दो लीला रूप उपेन्द्र और अच्युत हैं।"
 
"Of these eight expansions, two are the pastimes of Vasudeva. Their names are Adhokshaja and Purushottam. Two pastimes of Sankarshana are Upendra and Achyuta.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)