‘स्वयं - रूप’ ‘स्वयं - प्रकाश’ - दुइ रूपे स्फूर्ति ।
स्वयं - रूपे - एक ‘कृष्ण’ व्रजे गोप - मूर्ति ॥166॥
अनुवाद
"भगवान का मूल रूप [स्वयं-रूप] दो रूपों में प्रदर्शित होता है - स्वयं-रूप और स्वयं-प्रकाश। अपने मूल स्वयं-रूप में, कृष्ण वृंदावन में एक ग्वाल-बालक के रूप में देखे जाते हैं।
"The Lord's original form (Svayam-rupa) is manifested in two forms—Svayam-rupa and Svayam-prakasha. In His original form, Krishna is seen as a cowherd boy in Vrindavan.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥