श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  2.20.14 
तथापि यवन - मन प्रसन्न ना देखिला ।
सात - हाजार मुद्रा तार आगे राशि कैला ॥14॥
 
 
अनुवाद
सनातन गोस्वामी ने देखा कि मांसाहारी का मन अभी भी संतुष्ट नहीं हुआ है। तब उन्होंने उसके सामने सात हज़ार स्वर्ण मुद्राएँ रख दीं।
 
Sanatana Goswami saw that the flesh-eater was still not happy, so he placed a sum of seven thousand gold coins before him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)