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श्री चैतन्य चरितामृत
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अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा
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श्लोक 13
श्लोक
2.20.13
किछु भय नाहि, आमि ए - देशे ना रब ।
दरवेश ह ञा आमि मक्काके याइब” ॥13॥
अनुवाद
"तुम्हें डरने की कोई ज़रूरत नहीं है, क्योंकि मैं इस देश में नहीं रहूँगा। मैं एक भिक्षुक बन जाऊँगा और पवित्र शहर मक्का जाऊँगा।"
"You have nothing to fear, for I will not stay in this country. I will go to the holy city of Mecca as a monk."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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