श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 20: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा सनातन गोस्वामी को परम सत्य के विज्ञान की शिक्षा  »  श्लोक 128
 
 
श्लोक  2.20.128 
‘तुमि केने दुःखी, तोमार आछे पितृ - धन ।
तोमारे ना कहिल, अन्यत्र छाड़िल जीव न” ॥128॥
 
 
अनुवाद
ज्योतिषी ने पूछा, 'तुम दुखी क्यों हो? तुम्हारे पिता बहुत धनी थे, लेकिन उन्होंने अपनी संपत्ति तुम्हें नहीं बताई क्योंकि उनकी मृत्यु कहीं और हुई थी।'
 
"The astrologer asked, 'Why are you sad? Your father was very rich, but because he died elsewhere, he did not tell you about his wealth.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)