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श्लोक 2.19.70  |
दुँहार मुखे निरन्तर कृष्ण - नाम शुनि’ ।
भट्ट कहे, प्रभुर किछु इङ्गित - भङ्गी जानि’ ॥70॥ |
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| अनुवाद |
| दोनों भाइयों द्वारा निरंतर प्रगट किए जा रहे पवित्र नाम को सुनकर, वल्लभ भट्टाचार्य श्री चैतन्य महाप्रभु के संकेत समझ गए। |
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| Hearing both the brothers continuously chanting the name of Krishna, Vallabha Bhattacharya could understand the signals of Sri Chaitanya Mahaprabhu. |
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