श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 19: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा श्रील रूप गोस्वामी को उपदेश  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  2.19.48 
श्री - रूपे देखिया प्रभुर प्रसन्न हैल मन ।
‘उठ, उठ, रूप, आइस’, बलिला वचन ॥48॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु श्रील रूप गोस्वामी को देखकर बहुत प्रसन्न हुए और उन्होंने उनसे कहा, "खड़े हो जाओ! खड़े हो जाओ! मेरे प्रिय रूप, यहाँ आओ।"
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu was very pleased to see Srila Rupa Goswami. He said to him, “Get up! Get up! O dear Rupa! Come to me.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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