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श्लोक 2.19.47  |
नाना श्लोक प ड़ि’ उठे, पड़े बार बार ।
प्रभु देखि’ प्रेमावेश हइल दुँहार ॥47॥ |
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| अनुवाद |
| दोनों भाई आनंद से अभिभूत हो गए और विभिन्न संस्कृत श्लोकों का पाठ करते हुए बार-बार उठते और गिरते रहे। |
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| Both the brothers became engrossed in love and kept rising and falling repeatedly while reciting many Sanskrit verses. |
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