श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 19: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा श्रील रूप गोस्वामी को उपदेश  »  श्लोक 234
 
 
श्लोक  2.19.234 
एइ - मत मधुरे सब भाव - समाहार ।
अतएव आस्वादाधिक्ये करे चमत्कार ॥234॥
 
 
अनुवाद
"इसी प्रकार दाम्पत्य प्रेम के मंच पर भक्तों की समस्त भावनाएँ समाहित हो जाती हैं। उसका तीव्र स्वाद सचमुच अद्भुत होता है।"
 
"Similarly, the sweetness of the essence blends all the emotions of the devotees. Its rich flavor is certainly wonderful."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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