श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 19: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा श्रील रूप गोस्वामी को उपदेश  »  श्लोक 216
 
 
श्लोक  2.19.216 
नारायण - पराः सर्वे न कुतश्चन बिभ्यति ।
स्वर्गापवर्ग - नरकेष्वपि तुल्यार्थ - दर्शिनः ॥216॥
 
 
अनुवाद
"जो व्यक्ति भगवान नारायण की भक्ति करता है, उसे किसी भी चीज़ का भय नहीं रहता। स्वर्गलोक की प्राप्ति, नरक की निंदा और भवबंधन से मुक्ति, ये सभी भक्त को एक समान प्रतीत होते हैं।"
 
"A person completely devoted to the Supreme Personality of Godhead, Narayana, fears nothing. For a devotee, going to heaven, going to hell, and liberation from material bondage are all the same."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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