श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 19: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा श्रील रूप गोस्वामी को उपदेश  »  श्लोक 210
 
 
श्लोक  2.19.210 
पति - सुतान्वय - भ्रातृ - बान्धवान् अतिविल ङ्घ्य तेऽन्त्यच्युतागताः ।
गति - विदस्तवोद्गीत - मोहिताः कितव योषितः कस्त्यजेन्निशि ॥210॥
 
 
अनुवाद
"हे कृष्ण, हम गोपियाँ अपने पतियों, पुत्रों, परिवार, भाइयों और मित्रों की आज्ञा की उपेक्षा करके उनका साथ छोड़कर आपके पास आई हैं। आप हमारी इच्छाओं के बारे में सब कुछ जानते हैं। हम केवल आपकी बाँसुरी की परम धुन से आकर्षित होकर आपके पास आई हैं। परन्तु आप तो महा कपटी हैं, क्योंकि भला रात के अंधेरे में हम जैसी युवतियों का साथ कौन छोड़ेगा?"
 
"O Krishna, we have all come to you, disobeying the orders of our husbands, sons, family, brothers, and friends. You know everything about our desires. We have come attracted by your supremely musical flute. Yet, you are a great deceiver. Who would want to abandon young women like us in the darkness of night?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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