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श्लोक 2.19.133  |
चैतन्येर कृपा रूप लिखियाछेन आपने ।
रसामृत - सिन्धु - ग्रन्थेर मङ्गलाचरणे ॥133॥ |
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| अनुवाद |
| श्रील रूप गोस्वामी ने अपने ग्रन्थ भक्ति-रसामृत-सिंधु [1.1.2] के शुभ परिचय में श्री चैतन्य महाप्रभु की दया के बारे में स्वयं बताया है। |
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| Srila Rupa Goswami himself has written about the mercy of Sri Chaitanya Mahaprabhu in the Mangalacharana of his book Bhaktirasamrita Sindhu (1.1.2). |
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