श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 19: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा श्रील रूप गोस्वामी को उपदेश  »  श्लोक 112
 
 
श्लोक  2.19.112 
याँर इच्छा, प्रयागे ग्राज करिबे निमन्त्र ण’ ।
एत ब लि’ प्रभु लञा करिल गमन ॥112॥
 
 
अनुवाद
वल्लभ भट्ट ने कहा, “यदि कोई चाहे तो प्रयाग जाकर भगवान को निमंत्रण दे सकता है।” इस प्रकार वे भगवान को साथ लेकर प्रयाग के लिए प्रस्थान कर गए।
 
Vallabha Bhatta said, “Anyone who wishes can go to Prayag and invite Mahaprabhu.” So he set off for Prayag, taking Mahaprabhu with him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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