श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 18: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा वृन्दावन में भ्रमण  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  2.18.95 
साक्षात्दे खिल लोक - नाहिक संशय ।
शुनि’ हासि’ कहे प्रभु, - सब ‘सत्य’ हय ॥95॥
 
 
अनुवाद
“सभी ने स्वयं भगवान कृष्ण को देखा है। इसमें कोई संदेह नहीं है।” यह सुनकर श्री चैतन्य महाप्रभु हँसने लगे। फिर उन्होंने कहा, “सब कुछ सही है।”
 
"Everyone has seen Krishna in person; there is no doubt about it." Hearing this, Sri Chaitanya Mahaprabhu laughed and said, "This is all true."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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