vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 18: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा वृन्दावन में भ्रमण
»
श्लोक 95
श्लोक
2.18.95
साक्षात्दे खिल लोक - नाहिक संशय ।
शुनि’ हासि’ कहे प्रभु, - सब ‘सत्य’ हय ॥95॥
अनुवाद
“सभी ने स्वयं भगवान कृष्ण को देखा है। इसमें कोई संदेह नहीं है।” यह सुनकर श्री चैतन्य महाप्रभु हँसने लगे। फिर उन्होंने कहा, “सब कुछ सही है।”
"Everyone has seen Krishna in person; there is no doubt about it." Hearing this, Sri Chaitanya Mahaprabhu laughed and said, "This is all true."
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd