श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 18: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा वृन्दावन में भ्रमण  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  2.18.28 
आजि रा त्र्ये पलाह, ना रहिह एक - जन ।
ठाकुर लञा भाग’, आसिबे कालि यवन’ ॥28॥
 
 
अनुवाद
"आज रात ही इस गाँव से भाग जाओ, और एक भी आदमी को वहाँ न रहने दो। देवता को साथ लेकर चले जाओ, क्योंकि कल मुसलमान सिपाही आएँगे।"
 
"Flee this village tonight and not a single person should remain here. Take the idol of Gopal with you and flee from here, because the Muslim soldiers will arrive tomorrow."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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