श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 18: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा वृन्दावन में भ्रमण  »  श्लोक 215
 
 
श्लोक  2.18.215 
सेइ विप्रे, कृष्णदासे, प्रभु विदाय दिला ।
योड़ - हाते दुइ - जन कहिते लागिला ॥215॥
 
 
अनुवाद
सोरोक्षेत्र में भगवान ने सनोदिया ब्राह्मण और राजपुत्र कृष्णदास से घर लौटने का अनुरोध किया, किन्तु वे हाथ जोड़कर इस प्रकार बोलने लगे।
 
At Soro Kshetra, Mahaprabhu asked Sanodia Brahmin and Rajput Krishnadas to return home, but they folded their hands and spoke thus.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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