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श्लोक 2.18.198  |
निज - शास्त्र दे खि’ तुमि विचार करिया ।
कि लिखियाछे शेषे कह निर्णय करिया ॥198॥ |
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| अनुवाद |
| “अपनी कुरान को देखकर और उसमें लिखी बातों पर विचार करके, आप क्या निष्कर्ष निकालते हैं?” |
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| “What is your decision after looking at your Quran and considering what is written in it?” |
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