श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 18: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा वृन्दावन में भ्रमण  »  श्लोक 181
 
 
श्लोक  2.18.181 
म्लेच्छ - गण आसि’ प्रभुर वन्दिल चरण ।
प्रभु - आगे कहे , - एइ ठक् चारि - जन ॥181॥
 
 
अनुवाद
तब सभी मुसलमान सैनिक भगवान के सामने आये, उनके चरण कमलों की पूजा की और कहा, “यहाँ चार बदमाश हैं।
 
Then all the Muslim soldiers came before Mahaprabhu, worshipped his feet and said, “These four are cunning people (swindlers).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)