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श्लोक 2.18.165  |
एइ चारि बाटोयार धुतुरा खाओयाञा ।
मारि’ डारियाछे, यतिर सब धन लञा ॥165॥ |
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| अनुवाद |
| “इन चार बदमाशों ने उस संन्यासी को धूतुरा विष पिलाकर उसकी हत्या करने के बाद उसका सारा धन छीन लिया होगा।” |
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| “These four cunning people must have taken away the money of this monk after killing him by feeding him Datura.” |
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