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श्लोक 2.18.162  |
अचेतन ह ञा प्रभु भूमिते पड़िला ।
मुखे फेना पड़े, नासाय श्वास रुद्ध हैला ॥162॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान प्रेम से अभिभूत होकर अचेत होकर भूमि पर गिर पड़े। उनके मुख से झाग निकलने लगा और उनकी श्वास रुक गई। |
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| Overwhelmed with emotion, Mahaprabhu fell unconscious to the ground. Foam began to pour from his mouth and he stopped breathing. |
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