vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 2: मध्य लीला
»
अध्याय 18: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा वृन्दावन में भ्रमण
»
श्लोक 137
श्लोक
2.18.137
एत ब लि’ झाँप दिला जलेर उपरे ।
डुबिया रहिला प्रभु जलेर भितरे ॥137॥
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु यह विचार करते हुए कि अक्रूर जल में कैसे रह गये, तुरन्त ही पानी में कूद पड़े और कुछ समय तक जल के भीतर ही रहे।
Wondering how Akrura could stay underwater, Sri Chaitanya Mahaprabhu immediately jumped into the water and remained underwater for some time.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×