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श्लोक 2.18.119  |
मृग - मद वस्त्रे बान्थे, तबु ना लुकाय ।
‘ईश्वर - स्वभा व’ तोमार टाका नाहि याय ॥119॥ |
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| अनुवाद |
| "जिस प्रकार मृग कस्तूरी की सुगंध को कपड़े में लपेटकर छिपाया नहीं जा सकता, उसी प्रकार भगवान के रूप में आपके गुणों को किसी भी प्रकार से छिपाया नहीं जा सकता। |
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| “Just as the fragrance of musk cannot be hidden even when wrapped in a cloth, similarly Your qualities as the Supreme Personality of Godhead cannot be hidden in any way. |
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