श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 18: श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा वृन्दावन में भ्रमण  »  श्लोक 102
 
 
श्लोक  2.18.102 
‘वातुल’ ना हइओ, घरे रहत वसिया ।
‘कृष्ण’ दरशन करिह कालि रात्र्ये याञा” ॥102॥
 
 
अनुवाद
"पागल मत हो। बस यहीं बैठ जाओ, और कल रात तुम कृष्ण से मिलने जाओगे।"
 
"Don't be silly. Stay here and tomorrow night you will go to see Krishna."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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