श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 17: महाप्रभु की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  2.17.84 
‘पूर्वे शुनियाछि प्रभु कछेन सन्यास’ ।
निश्चय करिया हैल हृदये उल्लास ॥84॥
 
 
अनुवाद
तपन मिश्र सोचने लगे, “मैंने सुना है कि श्री चैतन्य महाप्रभु ने संन्यास स्वीकार कर लिया है।” यह सोचकर तपन मिश्र हृदय में बहुत प्रसन्न हुए।
 
Then Tapan Mishra thought, “I have heard that Sri Chaitanya Mahaprabhu has taken sannyasa.” Thinking this, Tapan Mishra was overjoyed.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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