श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 17: महाप्रभु की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  2.17.52 
गौड़, बङ्ग, उत्कल, दक्षिण - देशे गिया ।
लोकेर निस्तार कैल आपने भ्रमिया ॥52॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार श्री चैतन्य महाप्रभु ने स्वयं बंगाल, पूर्वी बंगाल, उड़ीसा तथा दक्षिणी देशों का भ्रमण किया और कृष्णभावनामृत का प्रचार करके सभी प्रकार के लोगों का उद्धार किया।
 
In this way Sri Chaitanya Mahaprabhu traveled to Bengal, East Bengal, Orissa and the southern countries and saved all kinds of people by spreading Krishna consciousness.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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