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श्री चैतन्य चरितामृत
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श्लोक 32
श्लोक
2.17.32
सेइ जल - बिन्दु - कणा लागे यार गाय ।
सेइ ‘कृष्ण’ ‘कृष्ण’ कहे, प्रेमे नाचे, गाय ॥32॥
अनुवाद
जिन हाथियों के शरीर भगवान द्वारा छिड़के गए जल से स्पर्शित हुए, वे “कृष्ण! कृष्ण!” का जाप करने लगे और आनंद में नाचने और गाने लगे।
The elephants on whose bodies the water sprinkled by Mahaprabhu fell, started saying, "Krishna! Krishna!" and started dancing and singing in love.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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