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श्लोक 2.17.223  |
कृष्णावेशे प्रभुर प्रेमे गरगर मन ।
‘बोल्’ ‘बोल्’ करि’ उठि’ करेन नर्तन ॥223॥ |
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| अनुवाद |
| श्री चैतन्य महाप्रभु का मन कृष्ण के प्रेम में विह्वल हो गया। वे तुरन्त उठ खड़े हुए और बोले, "जप करो! जप करो!" फिर वे स्वयं नाचने लगे। |
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| Sri Chaitanya Mahaprabhu's mind was awash in love for Krishna. He immediately stood up and said, "Sing kirtan! Sing kirtan!" Then he himself began to dance. |
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