श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 17: महाप्रभु की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  2.17.22 
प्रातः काले भक्त - गण प्रभु ना देखिया ।
अन्वेषण करि’ फिरे व्याकुल हञा ॥22॥
 
 
अनुवाद
चूँकि भगवान् चले गये थे, इसलिए भक्तगण उन्हें सुबह-सुबह न देख पाने के कारण बड़ी चिन्ता के साथ उनकी खोज करने लगे।
 
Since Mahaprabhu had already left, when the devotees did not see him in the morning, they became very anxious and started searching for him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)