श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 17: महाप्रभु की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 201
 
 
श्लोक  2.17.201 
फुल - फल भरि’ डाल पड़े प्रभु - पाय ।
बन्धु देखि’ बन्धु येन ‘भेट’ लञा याय ॥201॥
 
 
अनुवाद
फलों और फूलों से लदे वृक्षों की शाखाएँ और लताएँ भगवान के चरण कमलों पर गिर पड़ीं और उन्हें तरह-तरह की भेंटें देकर उनका स्वागत करने लगीं, मानो वे उनके मित्र हों।
 
Trees and creepers laden with flowers and fruits fell at the feet of Mahaprabhu and started welcoming him with various types of gifts, as if they were his friends.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)