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श्लोक 2.17.185  |
धर्म - स्थापन - हेतु साधुर व्यवहार ।
पुरी - गोसाञि र ये आचरण, सेइ धर्म सार ॥185॥ |
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| अनुवाद |
| "भक्त का आचरण धार्मिक सिद्धांतों के वास्तविक उद्देश्य को स्थापित करता है। माधवेंद्र पुरी गोस्वामी का आचरण ऐसे धार्मिक सिद्धांतों का सार है।" |
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| "The true purpose of religion is established through the conduct of the devotee. The conduct of Madhavendra Puri Goswami is the essence of such religions." |
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