श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 17: महाप्रभु की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 176
 
 
श्लोक  2.17.176 
भिक्षा ला गि’ भट्टाचार्ये कराइला रन्ध न ।
तबे महाप्रभु हासि’ बलिला वचन ॥176॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने बलभद्र भट्टाचार्य से श्री चैतन्य महाप्रभु का दोपहर का भोजन पकाने के लिए कहा। उस समय भगवान् मुस्कुराकर इस प्रकार बोले।
 
He asked Balabhadra Bhattacharya to prepare food for Mahaprabhu. At that moment, Mahaprabhu smiled and said these words.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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