श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 17: महाप्रभु की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 172
 
 
श्लोक  2.17.172 
किन्तु तोमार प्रेम देखि’ मने अनुमानि ।
माधवेन्द्र - पुरीर ‘सम्बन्ध’ धर - जानि ॥172॥
 
 
अनुवाद
"आपके इस आनंदमय प्रेम को देखकर, मैं बस यही सोच सकता हूँ कि माधवेंद्र पुरी के साथ आपका अवश्य ही कोई संबंध होगा। ऐसा मेरा मानना ​​है।"
 
"Judging by your intense love, I can guess that you must have some connection with Madhavendra Puri. That's what I think.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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