श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 17: महाप्रभु की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 158
 
 
श्लोक  2.17.158 
एक - विप्न पड़े प्रभुर चरण धरिया ।
प्रभु - सड़े नृत्य करे प्रेमाविष्ट हञा ॥158॥
 
 
अनुवाद
एक ब्राह्मण श्री चैतन्य महाप्रभु के चरण कमलों पर गिर पड़ा और फिर उनके साथ प्रेमोन्मत्त होकर नृत्य करने लगा।
 
A Brahmin came and fell at the lotus feet of Mahaprabhu and then, filled with love, started dancing along with him.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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