श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 17: महाप्रभु की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 156
 
 
श्लोक  2.17.156 
मथुरा आसिया कैला ‘विश्रान्ति - तीर्थे’ स्नान ।
‘जन्म - स्थाने’ ‘केशव’ देखि’ करिला प्रणाम ॥156॥
 
 
अनुवाद
जब श्री चैतन्य महाप्रभु मथुरा नगरी में प्रवेश कर रहे थे, तो उन्होंने विश्रामघाट पर स्नान किया। फिर वे कृष्ण जन्मभूमि पहुँचे और केशवजी नामक विग्रह के दर्शन किए। उन्होंने इस विग्रह को सादर प्रणाम किया।
 
Upon entering the city of Mathura, Sri Chaitanya Mahaprabhu bathed at Vishram Ghat. He then went to visit the birthplace of Krishna and met Keshavji. Mahaprabhu offered his respectful obeisances.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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