श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 17: महाप्रभु की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 149
 
 
श्लोक  2.17.149 
‘प्रयागे’ आसिया प्रभु कैल वेणी - स्नान ।
‘माधव’ देखिया प्रेमे कैल नृत्य - गान ॥149॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद श्री चैतन्य महाप्रभु प्रयाग गए, जहाँ उन्होंने गंगा और यमुना के संगम पर स्नान किया। इसके बाद वे वेणी माधव मंदिर गए और वहाँ प्रेमोन्मत्त होकर भजन-कीर्तन और नृत्य किया।
 
Sri Chaitanya Mahaprabhu then went to Prayag, where he bathed at the confluence of the Ganges and Yamuna rivers. He then went to the temple of Veni Madhava, where he sang and danced in ecstasy.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd