श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 17: महाप्रभु की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 113
 
 
श्लोक  2.17.113 
जगत्मङ्गल ताँर ‘कृष्ण - चैतन्य’ - नाम ।
नाम, रूप, गुण ताँर, सब - अनुपम ॥113॥
 
 
अनुवाद
"उनका नाम, कृष्ण चैतन्य, संसार के लिए सर्वमंगलकारी है। उनका सब कुछ - उनका नाम, रूप और गुण - अद्वितीय है।
 
"His name is Krishna Chaitanya, auspicious for the entire universe. Everything about Him—name, form, and qualities—is unique.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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