श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 92
 
 
श्लोक  2.16.92 
शुनिया प्रभुर वाणी मने विचारय ।
प्रभु - सने अति हठ कभु भाल नय ॥92॥
 
 
अनुवाद
जब सार्वभौम भट्टाचार्य और रामानन्द राय ने ये शब्द सुने, तो वे विचार करने लगे कि यह बिलकुल भी अच्छा नहीं था कि उन्होंने भगवान के साथ इतने छल किये।
 
When Sarvabhauma Bhattacharya and Ramanand Rai heard these words, they began to think that it was not a good thing that they had played so many tricks with Mahaprabhu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)