श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  2.16.91 
गौड़ - देश दिया याब ताँ - सबा देखियो ।
तुमि दुँहे आज्ञा दे ह’ परसन्न ह ञा ॥91॥
 
 
अनुवाद
"मैं बंगाल होते हुए वृंदावन जाऊँगा और अपनी माँ और गंगा नदी, दोनों के दर्शन करूँगा। अब क्या आप दोनों मुझे अनुमति देने की कृपा करेंगे?"
 
"I will go to Vrindavan via Bengal and see both my mother and the Ganges River. Will you both give me permission now?"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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