श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 90
 
 
श्लोक  2.16.90 
गौड़ - देशे हय मोर ‘दुइ समाश्र य’ ।
‘जननी’ ‘जाह्नवी’, - एइ दुइ दयामय ॥90॥
 
 
अनुवाद
"बंगाल में मेरे दो आश्रय हैं - मेरी माँ और गंगा नदी। दोनों ही बहुत दयालु हैं।"
 
"In Bengal I have two refuges—my mother and the Ganges River. Both are extremely kind."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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