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श्लोक 2.16.90  |
गौड़ - देशे हय मोर ‘दुइ समाश्र य’ ।
‘जननी’ ‘जाह्नवी’, - एइ दुइ दयामय ॥90॥ |
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| अनुवाद |
| "बंगाल में मेरे दो आश्रय हैं - मेरी माँ और गंगा नदी। दोनों ही बहुत दयालु हैं।" |
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| "In Bengal I have two refuges—my mother and the Ganges River. Both are extremely kind." |
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