श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  2.16.89 
अवश्य चलिब, दुँहे करह सम्मति ।
तोमा - दुँहा विना मोर नाहि अन्य गति ॥89॥
 
 
अनुवाद
"इस बार मुझे जाना ही होगा। क्या आप मुझे इजाज़त देंगे? आप दोनों के अलावा मेरे पास और कोई चारा नहीं है।"
 
"I must go now. You will give me permission, right? I have no other refuge except you two."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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