श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  2.16.8 
दुँहे कहे, - रथ - यात्रा कर दरशन ।
कार्तिक आइले, तबे करिह गमन ॥8॥
 
 
अनुवाद
रामानन्द राय और सार्वभौम भट्टाचार्य ने भगवान से अनुरोध किया कि वे पहले रथयात्रा उत्सव मनाएँ। फिर जब कार्तिक मास आए, तो वे वृन्दावन जा सकें।
 
Ramanand Rai and Sarvabhauma Bhattacharya requested Mahaprabhu to first celebrate the Rath Yatra festival and then go to Vrindavan when the month of Kartika arrived.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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