श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  2.16.79 
जगन्नाथ परेन तथा ‘माडुया’ वसन ।
देखिया सघृण हैल विद्यानिधिर मन ॥79॥
 
 
अनुवाद
जब पुण्डरीक विद्यानिधि ने देखा कि भगवान जगन्नाथ को कलफ लगा हुआ वस्त्र दिया गया है, तो उन्हें थोड़ा घृणा हुई। इस प्रकार उनका मन दूषित हो गया।
 
When Pundarik Vidyanidhi saw Jagannath being covered with starched clothing, he was filled with a slight disgust. Thus, his mind became corrupted.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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