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श्लोक 2.16.77  |
स्वरूप - सहित ताँर हय सख्य - प्रीति ।
दुइ - जनाय कृष्ण - कथाय एकत्र - इ स्थिति ॥77॥ |
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| अनुवाद |
| स्वरूप दामोदर गोस्वामी और पुण्डरीक विद्यानिधि के बीच मैत्रीपूर्ण एवं घनिष्ठ संबंध थे और जहां तक कृष्ण के विषय में चर्चा का प्रश्न था, वे एक ही मंच पर थे। |
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| Svarupa Damodara Goswami and Pundarika Vidyanidhi were close friends and were on equal footing when it came to discussing stories about Krishna. |
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