श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 2: मध्य लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु द्वारा वृन्दावन जाने की चेष्टा  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  2.16.60 
आचार्य - गोसाञि प्रभुके कहे ठारे - ठोरे ।
आचार्य तर्जा पड़े, केह बुझिते ना पारे ॥60॥
 
 
अनुवाद
तब श्रील अद्वैत आचार्य ने इशारों के माध्यम से चैतन्य महाप्रभु से कुछ कहा और कुछ काव्यात्मक अंश पढ़े, जो किसी की समझ में नहीं आए।
 
Then Srila Advaita Acharya said something to Chaitanya Mahaprabhu through gestures and recited some verses which no one could understand.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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